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मानदेय बढ़ा, फिर भी नगर सैनिकों का शोषण क्यों? ₹1,029 से ₹1,114 प्रतिदिन के भुगतान पर उठे सवाल,आदेश जारी होने के बाद भी नगर सैनिकों में असंतोष, दैनिक मानदेय की गणना और वास्तविक आर्थिक लाभ पर उठे सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा नगर सैनिकों के दैनिक मानदेय की दरों में संशोधन का आदेश जारी किए जाने के बाद नगर सैनिकों के हितों और उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर सैनिकों के एक वर्ग का कहना है कि मानदेय की दरों में संशोधन के बावजूद उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शासन का यह आदेश नगर सैनिकों को राहत देने के लिए पर्याप्त है, या उनकी आर्थिक समस्याएं अब भी बरकरार हैं?गृह विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश क्रमांक LAW-42/1021/2025-O/O SECTION JAIL में नगर सैनिकों के दैनिक मानदेय की संशोधित दरें निर्धारित की गई हैं। आदेश के अनुसार, विभिन्न पदों के लिए प्रतिदिन मानदेय, महंगाई भत्ता (DA) और वर्दी धुलाई भत्ते को मिलाकर कुल राशि तय की गई है।आदेश में सैनिक के लिए कुल ₹1,029 प्रतिदिन, लांस नायक के लिए ₹1,038, नायक के लिए ₹1,048, हवलदार के लिए ₹1,057, कंपनी क्वार्टर मास्टर एवं कंपनी हवलदार मेजर के लिए ₹1,067, डीपीसीसी के लिए ₹1,091 और डीसीसी के लिए ₹1,114 प्रतिदिन की राशि दर्शाई गई है।लेकिन इन आंकड़ों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल मानदेय की दरों में संशोधन कर देने से नगर सैनिकों की आर्थिक परेशानियां दूर हो जाएंगी?आदेश जारी, लेकिन नगर सैनिकों के सवाल बरकरारनगर सैनिकों का कहना है कि उनकी सेवाओं की प्रकृति, जिम्मेदारियों और ड्यूटी की परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय तथा अन्य सुविधाओं की समीक्षा आवश्यक है। यदि किसी कर्मचारी को अपनी दैनिक जरूरतों, परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो केवल संशोधित दरों का उल्लेख उसके लिए पर्याप्त राहत नहीं माना जा सकता।हालांकि, जारी आदेश में निर्धारित राशि के आधार पर ही शोषण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन नगर सैनिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति, भुगतान की प्रक्रिया, ड्यूटी के दिनों और अन्य सुविधाओं का परीक्षण जरूरी है। यही वे बिंदु हैं, जिन पर शासन और संबंधित विभाग को स्पष्टता देनी चाहिए।क्या मानदेय में संशोधन ही पर्याप्त है?नगर सैनिकों की सेवा व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि उनके मानदेय का निर्धारण किन आधारों पर किया जाता है। क्या उनकी ड्यूटी की अवधि, कार्य की जिम्मेदारी, जोखिम और महंगाई के अनुपात में भुगतान का समुचित आकलन किया जाता है? क्या उन्हें समय पर भुगतान और आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं?यदि नगर सैनिकों को अपनी सेवाओं के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है, तो शासन को उनकी समस्याओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करना चाहिए। मानदेय संबंधी किसी भी निर्णय का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है, जब कागजों पर निर्धारित राशि और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक लाभ के बीच की स्थिति स्पष्ट हो।शासन से अपेक्षा—नगर सैनिकों की समस्याओं की हो समीक्षानगर सैनिकों की आर्थिक समस्याओं को केवल मानदेय संशोधन के आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शासन को चाहिए कि वह उनकी मांगों, सेवा परिस्थितियों और आर्थिक आवश्यकताओं का समग्र आकलन करे। साथ ही, मानदेय की गणना, भुगतान की नियमितता और अन्य सुविधाओं के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करे।सवाल यह नहीं है कि आदेश में कितनी राशि लिखी गई है, बल्कि सवाल यह है कि इस संशोधन से नगर सैनिकों को वास्तविक राहत कितनी मिल रही है। यदि उनकी आर्थिक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, तो शासन को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।नगर सैनिक भी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी सेवाओं और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और संबंधित विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

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