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स्कूटी पर सवार विधायक का ‘वोट चोरी’ पर वार, जनता पूछ रही—आम आदमी का चालान, रसूखदारों को राहत?ऑनलाइन चालान की कार्रवाई पर उठे सवाल, क्या यातायात नियमों के पालन में सबके लिए एक जैसे हैं कानून? देखें विडियो।

विकास नंद/सर्वव्यापी

लोकतंत्र में वोट की ताकत और सड़क पर कानून की समानता, दोनों ही आम जनता के लिए बेहद मायने रखते हैं। एक ओर कांग्रेस विधायक स्कूटी पर सवार होकर ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर आवाज बुलंद करते नजर आते हैं, तो दूसरी ओर आम नागरिकों के मन में यातायात नियमों के उल्लंघन पर होने वाले ऑनलाइन चालान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जनता के बीच चर्चा है कि जब आम आदमी की छोटी-सी गलती पर ऑनलाइन चालान कट सकता है, तो क्या नियमों का पालन कराने वाली व्यवस्था सभी के लिए समान रूप से लागू हो रही है?

आम आदमी पर सख्ती, रसूखदारों पर नरमी क्यों?

आज तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों का उल्लंघन पकड़ना और ऑनलाइन चालान जारी करना पहले से आसान हो गया है। सीसीटीवी कैमरों और अन्य डिजिटल माध्यमों से नियम तोड़ने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाती है। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या कार्रवाई करते समय व्यक्ति की पहचान, पद या राजनीतिक रसूख का कोई प्रभाव पड़ता है?यदि नियम तोड़ने पर आम नागरिक का ऑनलाइन चालान कटता है, तो जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों के मामले में भी समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। आखिर कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं, फिर कार्रवाई में भेदभाव की आशंका क्यों पैदा होनी चाहिए?

‘वोट चोरी’ के सवाल के साथ यातायात व्यवस्था पर भी चर्चा

कांग्रेस विधायक का स्कूटी पर सवार होकर ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर आवाज उठाना राजनीतिक चर्चा का विषय हो सकता है। वहीं, इस घटनाक्रम के बहाने यातायात व्यवस्था और ऑनलाइन चालान की निष्पक्षता पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।हालांकि, केवल किसी जनप्रतिनिधि को स्कूटी पर सवार देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उन्होंने यातायात नियमों का उल्लंघन किया है या उनके विरुद्ध चालान बनता था। इसी तरह, बिना प्रमाण यह कहना भी उचित नहीं होगा कि किसी व्यक्ति को उसके पद या चेहरे के कारण चालान से छूट दी गई।

जनता का सीधा सवाल—क्या कानून सबके लिए बराबर है?

जनता के मन में उठ रहे सवाल का जवाब तथ्यों और पारदर्शी कार्रवाई से ही मिल सकता है। यदि ऑनलाइन चालान की व्यवस्था निष्पक्ष है, तो उसका पालन प्रत्येक नागरिक के लिए समान रूप से सुनिश्चित होना चाहिए। आम आदमी हो या जनप्रतिनिधि, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का आधार एक ही होना चाहिए।अब सवाल यह है कि ऑनलाइन चालान की व्यवस्था वास्तव में नियमों के आधार पर चल रही है या लोगों के मन में चेहरा और रसूख देखकर कार्रवाई होने की आशंका बनी हुई है?

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