तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली अनुविभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) एवं डिप्टी कलेक्टर रोहित सिंह के स्थानांतरण को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। बताया जा रहा है कि राज्य शासन द्वारा उनका स्थानांतरण जशपुर जिले के लिए किया गया है, लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उन्हें वर्तमान पदस्थापना से रिलीव नहीं किया गया है।प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि कलेक्टर कुणाल दुदावत को मंत्रालय में पदस्थ एक वरिष्ठ सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा रोहित सिंह को फिलहाल रिलीव नहीं करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इस कथित निर्देश की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।यही वजह है कि अब प्रशासनिक महकमे में सवाल उठने लगे हैं कि जब राज्य शासन ने स्थानांतरण आदेश जारी कर अधिकारी की नई पदस्थापना तय कर दी है, तो फिर उन्हें रिलीव करने में देरी क्यों हो रही है? क्या शासन के स्थानांतरण आदेश पर किसी स्तर से रोक लगाई गई है या फिर इसके पीछे कोई प्रशासनिक आवश्यकता बताई गई है?शासन के आदेश और स्थानीय स्तर के निर्देश में कौन प्रभावी?स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी अधिकारी के स्थानांतरण के बाद उसे रिलीव नहीं किए जाने की स्थिति स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े करती है। यदि रोहित सिंह को तत्काल रिलीव नहीं किया जाना है तो क्या इसके संबंध में कोई लिखित आदेश जारी हुआ है? यदि लिखित आदेश नहीं है तो मौखिक निर्देश के आधार पर शासन के स्थानांतरण आदेश को लंबित रखने का आधार क्या है?मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन अथवा राज्य शासन की ओर से इस संबंध में क्या आधिकारिक स्थिति सामने आती है। यदि रिलीविंग पर रोक संबंधी कोई आदेश है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठ रहे सवालपाली एसडीएम के स्थानांतरण और रिलीविंग को लेकर चल रही चर्चाओं ने प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आखिर किस कारण से शासन के स्थानांतरण आदेश के बावजूद अधिकारी को वर्तमान पद से मुक्त नहीं किया जा रहा है? क्या किसी विशेष प्रशासनिक परिस्थिति के कारण यह निर्णय लिया गया है?फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट जवाब आधिकारिक स्तर पर सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले में राज्य शासन और जिला प्रशासन का अधिकृत स्पष्टीकरण ही स्थिति साफ कर सकता है।




