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27 सितंबर को होगी नव साक्षरों की देशव्यापी मूल्यांकन परीक्षा, महासमुंद में बनाए गए 76 परीक्षा केंद्र।

विकास नंद/सर्वव्यापी

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत नव साक्षर शिक्षार्थियों के बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान का आकलन करने के लिए देशव्यापी मूल्यांकन परीक्षा 27 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में जिले में परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।परीक्षा 27 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी। इसमें 15 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षार्थी शामिल होंगे। महासमुंद जिले में शिक्षार्थियों के आकलन के लिए 76 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं तथा प्रत्येक केंद्र के लिए एक-एक केंद्राध्यक्ष सह पर्यवेक्षक की नियुक्ति की गई है। जिले से कुल 682 शिक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पढ़ना, लिखना और गणित के होंगे प्रश्न

शिक्षार्थी अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित समयावधि के भीतर परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। प्रश्नपत्र हल करने के लिए प्रत्येक शिक्षार्थी को तीन घंटे का समय मिलेगा। प्रश्नपत्र को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जिसमें पढ़ना, लिखना और गणित शामिल हैं। प्रत्येक भाग 50 अंकों का होगा और सभी प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य रहेगा।

गुणवत्ता के साथ परीक्षा कराने के निर्देश

मूल्यांकन परीक्षा के सुचारू एवं गुणवत्तापूर्ण आयोजन के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा विकासखंड परियोजना अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। परीक्षा को सफल बनाने के लिए जिले के संकुल समन्वयक, प्रधान पाठक, शिक्षक एवं स्वयंसेवी शिक्षक तैयारियों में जुटे हुए हैं।परीक्षा की निगरानी के लिए जिला स्तर पर गठित मॉनिटरिंग दल में जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य डाइट, जिला मिशन समन्वयक, जिला परियोजना अधिकारी एवं जिला नोडल अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं विकासखंड स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड नोडल अधिकारी तथा महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा और सरायपाली के बीआरसीसी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे।

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों को बुनियादी पढ़ने-लिखने और संख्यात्मक ज्ञान से जोड़ना है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। मूल्यांकन परीक्षा के माध्यम से शिक्षार्थियों की अर्जित दक्षताओं का आकलन किया जाएगा।

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