
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के माटी म जनसेवा के भावना, अपन मान-सम्मान अउ न्याय के परंपरा ह हमेशा ले खास महत्त्व रखे हे। ए माटी ह अइसने बेटी मन ल जनम देहे, जेमन अपन मेहनत, हिम्मत अउ लगन ले समाज म अपन अलग पहिचान बनाय हें। आईपीएस अंकिता शर्मा घलो अइसनेच एक झन महिला अधिकारी आयं, जेन ह अपन काम अउ जिम्मेदारी के सेती प्रदेश भर म चर्चा म रहिथें। फेर आज राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा एक नवा विवाद के घेरी म हें। अइसन बेरा म जरूरी हे कि हमन भावुकता म नइ, बल्कि निष्पक्षता अउ न्याय के नजरिया ले पूरा मामला ल देखन।विजयादशमी के अवसर म राजनांदगांव पुलिस लाइन म शस्त्र पूजा के आयोजन होइस। पूजा के बाद अंकिता शर्मा के एके-47 राइफल ले हवाई फायरिंग करे के वीडियो सोशल मीडिया म वायरल होइस। ए वीडियो के बाद पुलिस मुख्यालय ह उनला कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगे हे। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होही कि घटना के परिस्थिति का रहिस अउ नियम मन के पालन कतेक होइस।फेर ए पूरा मामला म एक सवाल आम जनता के मन म उठत हे—अगर एके जइसन घटना दूसर जिला मन म घलो होय हे, त कार्रवाई के मापदंड सब्बो बर एके काबर नइ होवय?हमर समाज म दशहरा के दिन शस्त्र पूजा करे के पुराना परंपरा हे। पुलिस अउ सुरक्षा बल मन घलो अपन शस्त्र मन के पूजा करके देश अउ जनता के रक्षा करे के संकल्प लेथें। ए परंपरा के अपन सांस्कृतिक महत्त्व हे। फेर शस्त्र पूजा करना अउ शस्त्र चलाना—दूनों अलग-अलग बात आय। सरकारी हथियार के उपयोग म सुरक्षा नियम अउ विभागीय अनुशासन के पालन होना जरूरी हे।ए बात ल स्वीकार करे म कोनो हिचकिचाहट नइ होना चाही कि नियम सब्बो अधिकारी बर समान होना चाही। अगर कोनो गलती होय हे, त ओकर जांच होना चाही। फेर जांच के दायरा घलो निष्पक्ष होना चाही। जिहां-जिहां अइसने घटना के प्रमाण मिलत हे, उहाँ-वहाँ एके मापदंड ले जांच होय, तभे जनता के मन म व्यवस्था ऊपर भरोसा बने रहिही।नियम के पालन जरूरी हे, फेर नियम के पालन करवइया व्यवस्था के निष्पक्षता घलो ओतके जरूरी हे।आज के सोशल मीडिया के जमाना म कोनो घटना के कुछ सेकेंड के वीडियो ह मिनट भर म लाखों लोगन तक पहुंच जाथे। वीडियो देखके लोग अपन-अपन राय बनाय लगथें। कोनो तारीफ करथे, त कोनो आलोचना। फेर एक जिम्मेदार समाज के रूप म हमन ला ए बात समझे के जरूरत हे कि वायरल वीडियो जांच के आधार बन सकथे, जांच के अंतिम फैसला नइ।अंकिता शर्मा के मामला म घलो जरूरी हे कि घटना के पूरा संदर्भ, हथियार के प्रकार, उपयोग करे गे कारतूस, सुरक्षा के इंतजाम अउ विभागीय नियम के स्थिति के जांच होवय। अगर कोनो नियम के उल्लंघन होय हे, त विभाग नियमानुसार फैसला लेवय। अउ अगर घटना के संबंध म कोनो जरूरी तथ्य अभी सामने नइ आय हे, त बिना पूरा जांच के कोनो अधिकारी ल दोषी ठहराना उचित नइ होही।कारण बताओ नोटिस जारी होना अउ अंतिम रूप ले दोषी साबित होना—दूनों अलग-अलग बात आय। ए फर्क ल समझना जरूरी हे।एक महिला अधिकारी के बरसों के मेहनत, प्रशिक्षण अउ प्रशासनिक जिम्मेदारी के मूल्यांकन सिरिफ एक वायरल वीडियो के आधार म करना उचित नइ हे। अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ के उन महिला अधिकारी मन म ले एक हें, जेमन अपन सेवा के माध्यम ले पहचान बनाय हे। महिला मन के बढ़त भागीदारी ह हमर समाज बर गर्व के बात आय।फेर ए बात के मतलब ए नइ कि महिला अधिकारी मन ऊपर सवाल नइ उठाय जा सकय। नियम सब्बो बर समान हे। जेन अधिकारी ले गलती होही, ओकर जांच होना चाही; फेर जेन अधिकारी के खिलाफ आरोप लगथे, ओकर पक्ष ल सुने बिना फैसला घलो नइ होना चाही।अंकिता शर्मा महिला अधिकारी हें, ए सेती उनला विशेष छूट नइ मिलना चाही; अउ महिला अधिकारी हें, ए सेती उनकर संग भेदभाव घलो नइ होना चाही।यही निष्पक्षता के असली कसौटी आय।मीडिया म अइसन खबर सामने आय हे कि राजनांदगांव के अलावा छत्तीसगढ़ के दूसर जिला मन म घलो शस्त्र पूजा के बाद पुलिस अधिकारी मन के फायरिंग करे के वीडियो सामने आय हें। अगर ए खबर सही हे, त पुलिस विभाग ल स्पष्ट करना चाही कि बाकी मामला मन म जांच के स्थिति का हे।का सब्बो घटना के परिस्थिति एके जइसन रहिस? का सब्बो मामला म सुरक्षा नियम के पालन होय रहिस? का दूसर अधिकारी मन के भूमिका के घलो समीक्षा होवत हे?ए सवाल मन के जवाब तथ्य अउ जांच के आधार म मिलना चाही। बिना पुष्टि के ककरो ऊपर आरोप लगाना उचित नइ, फेर एके जइसन मामला म अलग-अलग मापदंड अपनाय के आशंका पैदा होथे, त ओकर समाधान करना विभाग के जिम्मेदारी आय।जनता ल ए भरोसा मिलना चाही कि विभागीय कार्रवाई सोशल मीडिया म वीडियो कतेक वायरल होइस, ए आधार म नइ, बल्कि घटना के तथ्य अउ लागू नियम के आधार म होथे।छत्तीसगढ़ के बेटी मन आज शिक्षा, प्रशासन, पुलिस, सेना अउ समाज के अलग-अलग क्षेत्र म अपन प्रतिभा के परचम लहरा थें। अंकिता शर्मा जइसन अधिकारी मन के मौजूदगी ह नवा पीढ़ी के बेटियों बर प्रेरणा बन सकथे।फेर कोनो अधिकारी के सम्मान के मतलब ए नइ कि ओकर हर काम के समर्थन करे जावय। असली सम्मान त एमा हे कि ओकर पक्ष ल निष्पक्ष रूप ले सुने जावय, आरोप के जांच तथ्य के आधार म होवय अउ फैसला नियम के मुताबिक होवय।अगर अंकिता शर्मा अपन जवाब म घटना के परिस्थिति अउ लागू नियम के संबंध म संतोषजनक स्पष्टीकरण देथें, त विभाग ल ओकर निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाही। अउ अगर जांच म नियम के उल्लंघन साबित होथे, त नियमानुसार कार्रवाई होना चाही। यही न्याय के सही रास्ता आय।फैसला जल्दबाजी म नइ, निष्पक्ष जांच के बाद होवयआज जरूरत ए बात के नइ हे कि कोनो अधिकारी के पक्ष म बिना तथ्य के नारा लगाय जावय, या सोशल मीडिया के आलोचना के आधार म उनला दोषी मान लिहा जावय। जरूरत ए बात के हे कि पूरा घटनाक्रम के निष्पक्ष जांच होवय, संबंधित अधिकारी के पक्ष सुने जावय अउ लागू नियम के मुताबिक फैसला होवय।राजनांदगांव के एसपी अंकिता शर्मा के मामला ह पुलिस विभाग के सामने एक जरूरी सवाल रखे हे—का विभाग सब्बो अधिकारी मन बर एके नियम अउ एके मापदंड अपनावत हे?अगर जवाब हां म हे, त जांच के प्रक्रिया अउ निष्कर्ष ल स्पष्ट करे म कोनो परेशानी नइ होना चाही। अउ अगर दूसर मामला मन म घलो अइसने परिस्थिति हे, त उहाँ घलो नियम के मुताबिक कार्रवाई होय के स्थिति स्पष्ट होना चाही।काबर कि न्याय के मतलब सिरिफ गलती खोजे नइ, बल्कि बिना भेदभाव के सही फैसला लेना घलो आय।आखिरी गोठ बात-अंकिता शर्मा के मामला म हमर पक्ष साफ हे—उनला बिना पूरा जांच के दोषी नइ ठहराय जाना चाही। संग म, शस्त्र के उपयोग म सुरक्षा अउ अनुशासन के महत्त्व ल घलो कम करके नइ आंकना चाही। विभाग के जिम्मेदारी आय कि हर तथ्य के जांच करय, अधिकारी के जवाब ल सुने अउ सब्बो मामला म एके मापदंड अपनाय।छत्तीसगढ़ के जनता ल कोनो अधिकारी बर विशेष छूट नइ चाही। जनता ल चाही न्याय, निष्पक्षता अउ पारदर्शिता।अंकिता शर्मा के मामला म सवाल सिरिफ एक झन महिला आईपीएस अधिकारी के नइ हे; सवाल ए हे कि हमर व्यवस्था म नियम सब्बो बर समान हे कि नइ।नियम सब्बो बर समान होवय, जांच निष्पक्ष होवय अउ फैसला तथ्य के आधार म होवय—यही न्याय आय, यही सुशासन आय अउ यही छत्तीसगढ़ के जनता के अपेक्षा घलो आय।




