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संपादक की कलम से..स्मृति ईरानी का पहला प्रवास: सरकार की ज़मीनी हकीकत परखेंगी या तारीफों में दब जाएंगे जनता के सवाल?

तरुण कौशिक , संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के प्रथम प्रवास को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं स्वाभाविक हैं। उनके इस दौरे को केवल संगठनात्मक बैठक, नेताओं से मुलाकात और सरकार की उपलब्धियों के बखान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस प्रवास के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता की वास्तविक समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी स्थिति से रूबरू होने का अवसर मिलेगा, या फिर उनके सामने उपलब्धियों का ऐसा चित्र प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें सरकार की तारीफ तो होगी, लेकिन जनता की परेशानियां कहीं पीछे छूट जाएंगी?यह सवाल किसी राजनीतिक विरोध की उपज नहीं, बल्कि स्वस्थ लोकतंत्र में जवाबदेही की अपेक्षा है।महतारी वंदन योजना: उपलब्धि या सरकार के मूल्यांकन का एकमात्र आधार?छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की प्रमुख योजनाओं में महतारी वंदन योजना का विशेष स्थान है। इस योजना के माध्यम से पात्र विवाहित महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में इसे सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।लेकिन क्या किसी सरकार के संपूर्ण कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक योजना के आधार पर किया जा सकता है?निश्चित रूप से नहीं!सरकार के कामकाज की असली कसौटी यह है कि महिलाओं को आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और सम्मान के कितने अवसर मिल रहे हैं। युवाओं को रोजगार के कितने अवसर उपलब्ध हुए हैं? किसानों की समस्याओं का कितना समाधान हुआ है? गरीब परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ कितनी सहजता से मिल रहा है? ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति क्या है?महतारी वंदन योजना की उपलब्धियों का आकलन आवश्यक है, लेकिन इसके साथ दूसरी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा भी उतनी ही जरूरी है।किसी एक योजना की सफलता सरकार के समग्र प्रदर्शन का प्रमाणपत्र नहीं हो सकती।क्या स्मृति ईरानी तक पहुंचेगी जनता की वास्तविक आवाज?किसी भी प्रदेश प्रभारी के दौरे की सार्थकता इस बात से तय होती है कि वह अपने संगठन और सरकार के बारे में कितनी वास्तविक जानकारी जुटा पाता है। यदि किसी दौरे में केवल चुनिंदा नेताओं की बैठकें हों, अधिकारियों से औपचारिक चर्चा हो और उपलब्धियों के आंकड़े प्रस्तुत किए जाएं, तो जनता की वास्तविक स्थिति का संपूर्ण आकलन कठिन हो सकता है।स्मृति ईरानी के सामने भी यही चुनौती होगी कि वे सरकार की उपलब्धियों के साथ उसकी चुनौतियों को समझने के लिए कितना समय देती हैं।क्या उन्हें उन लोगों से सीधे बातचीत करने का अवसर मिलेगा, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं? क्या वे बेरोजगार युवाओं की अपेक्षाओं को समझेंगी? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों की समस्याओं और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली की जानकारी लेंगी? क्या पुलिस व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सरकारी विभागों में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर भी वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास होगा?इन सवालों के जवाब ही उनके प्रवास की उपयोगिता को स्पष्ट करेंगे।तारीफों के बीच दब न जाएं कमियांभारतीय राजनीति में किसी भी सरकार के सामने अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। राजनीतिक बैठकों में सफलता की कहानियां सुनाई जाती हैं, योजनाओं के आंकड़े रखे जाते हैं और जनकल्याणकारी फैसलों का उल्लेख किया जाता है।यह गलत भी नहीं है। सरकार को अपनी उपलब्धियां बताने का पूरा अधिकार है।लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब उपलब्धियों की चर्चा के बीच कमियों पर सवाल पूछने की गुंजाइश कम हो जाए। किसी भी राजनीतिक नेतृत्व के लिए प्रशंसा सुनना सुखद हो सकता है, लेकिन शासन को बेहतर बनाने के लिए आलोचना, असहमति और जमीनी शिकायतों को सुनना भी उतना ही आवश्यक है।स्मृति ईरानी का यह प्रवास तभी सार्थक माना जाएगा, जब सरकार की प्रशंसाओं के साथ उन सवालों पर भी चर्चा हो, जिनका जवाब जनता लंबे समय से चाहती है।आखिरकार, किसी प्रदेश की वास्तविक तस्वीर केवल सरकारी प्रस्तुतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के अनुभवों से भी बनती है।विष्णुदेव सरकार के सामने जवाबदेही की कसौटीमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी यह अवसर आत्ममंथन का हो सकता है। सरकार ने अपनी योजनाओं और नीतियों के माध्यम से जनता तक पहुंचने का प्रयास किया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन प्रयासों के परिणामों का निष्पक्ष आकलन किया जाए।कितने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिला? कितनी शिकायतों का समाधान हुआ? सरकारी विभागों में लंबित मामलों की स्थिति क्या है? प्रशासनिक निर्णयों का आम नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ा है? और जहां कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?ये ऐसे सवाल हैं, जिनका उत्तर किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि तथ्यों, आंकड़ों और प्रत्यक्ष जनसंवाद से मिलना चाहिए।यदि सरकार की उपलब्धियां मजबूत हैं, तो उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और स्वतंत्र समीक्षा के सामने भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। वहीं, यदि कहीं कमियां हैं, तो उन्हें स्वीकार करके सुधार करना ही सुशासन की दिशा में उचित कदम होगा।संगठन की समीक्षा या सरकार की हकीकत का परीक्षण?स्मृति ईरानी का प्रवास संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन जनता की निगाहें इस बात पर भी रहेंगी कि सरकार के कामकाज को लेकर क्या संदेश सामने आता है।क्या समीक्षा का दायरा केवल राजनीतिक संगठन और चुनावी उपलब्धियों तक सीमित रहेगा? या फिर सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक जवाबदेही और जनसमस्याओं को भी पर्याप्त महत्व मिलेगा?यह अंतर समझना जरूरी है। संगठन की मजबूती और सरकार की लोकप्रियता राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन सुशासन का मूल्यांकन जनता को मिलने वाली सुविधाओं, समस्याओं के समाधान और सरकारी तंत्र की जवाबदेही के आधार पर भी होना चाहिए।यदि किसी सरकार के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट सामने आती है, तो उसके पीछे ठोस तथ्य होने चाहिए। इसी तरह, यदि किसी विभाग के कामकाज पर सवाल उठते हैं, तो उनका परीक्षण भी प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए।अंतिम सवाल: तारीफों से संतुष्टि या सच्चाई से सुधार?स्मृति ईरानी के प्रथम प्रवास को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इस दौरान छत्तीसगढ़ की सरकार की उपलब्धियों के साथ उसकी चुनौतियों का भी निष्पक्ष आकलन हो पाएगा या नहीं।महतारी वंदन योजना सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता की अपेक्षाएं इससे कहीं व्यापक हैं। महिलाएं आर्थिक सहायता के साथ सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं चाहती हैं। युवा रोजगार के अवसर चाहते हैं। किसान अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। आम नागरिक सरल प्रशासन, समयबद्ध सेवाएं और अपनी शिकायतों पर कार्रवाई की अपेक्षा रखते हैं।इन सभी अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर ही सरकार के कामकाज की तस्वीर पूरी हो सकती है।क्योंकि लोकतंत्र में सरकार की सफलता का अंतिम पैमाना नेताओं की बैठकों में होने वाली प्रशंसा नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आने वाला वास्तविक बदलाव है।स्मृति ईरानी के सामने अवसर है कि वे छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को केवल प्रस्तुतियों के माध्यम से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष जनसंवाद और तथ्यपरक समीक्षा के जरिए समझें। वहीं, विष्णुदेव सरकार के लिए भी यह अवसर है कि वह अपनी उपलब्धियों के साथ चुनौतियों को सामने रखकर सुधार की दिशा में आगे बढ़े।अब देखना यह है कि यह प्रवास सरकार की उपलब्धियों के बखान तक सीमित रहता है या जनता की अपेक्षाओं, शिकायतों और जमीनी हकीकत को समझने का माध्यम भी बनता है।आखिरकार, सत्ता के गलियारों में गूंजती तारीफें कुछ समय के लिए संतोष दे सकती हैं, लेकिन जनता के सवालों का जवाब और समस्याओं का समाधान ही शासन की वास्तविक परीक्षा है।

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