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अनुपमा आनंद को मिली कई विभागों की कमान, कलेक्टर लंगेह ने बदला अधिकारियों का कार्य विभाजन, नए प्रभार के साथ अधिकारियों के सामने समयबद्ध निराकरण की चुनौती।

विकास नंद/सर्वव्यापी

जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और शासकीय कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विनय कुमार लंगेह ने अधिकारियों के बीच पूर्व में निर्धारित कार्य विभाजन में संशोधन किया है। जारी आदेश के तहत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर एवं डिप्टी कलेक्टरों के मध्य विभिन्न विभागों और जिला कार्यालय की शाखाओं की जिम्मेदारियां नए सिरे से निर्धारित की गई हैं। यह व्यवस्था आगामी आदेश पर्यंत प्रभावी रहेगी।प्रशासनिक कार्य विभाजन में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद को कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा को अपर कलेक्टर सरायपाली का प्रभार देते हुए राजस्व मामलों के निराकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं।

अनुपमा आनंद के जिम्मे कई महत्वपूर्ण विभाग

जारी आदेश के अनुसार, जिला पंचायत के कार्यों के अतिरिक्त सीईओ अनुपमा आनंद को मुख्यमंत्री की घोषणाओं एवं निर्देशों के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य, जिला आयुर्वेद, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, कृषि, पशु चिकित्सा सेवाएं, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, रेशम, शिक्षा, ग्रामीण यांत्रिकी सेवाएं, क्रेडा, मुख्यमंत्री कौशल विकास, ग्रामोद्योग एवं हाथकरघा सहित विभिन्न विभागों का प्रभारी अधिकारी बनाया गया है।इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र, जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), निःशक्त कल्याण एवं पुनर्वास तथा जिले में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और समारोहों के लिए प्रभारी एवं समन्वयक की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।

इन विभागों के कार्यों में बेहतर तालमेल स्थापित करना, शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करना नई व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू होंगे।

सरायपाली और बसना के राजस्व मामलों की जिम्मेदारी सचिन भूतड़ा को

अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा को अपर कलेक्टर सरायपाली का प्रभार सौंपा गया है। उन्हें बसना एवं सरायपाली तहसीलों के निर्धारित राजस्व प्रकरणों में प्रथम अपील, निगरानी एवं पुनरीक्षण प्रकरणों की सुनवाई तथा निराकरण का दायित्व दिया गया है।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 के अंतर्गत कलेक्टर की अधिकारिता में आने वाले द्वितीय अपील के प्रकरणों की सुनवाई एवं निराकरण की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। नजूल पट्टों के नवीनीकरण और नजूल शाखा के निर्धारित प्रकरणों के अंतिम निराकरण का दायित्व भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया है।पटवारियों की हड़ताल के बीच प्रशासनिक बदलाव पर नजरजिले में पटवारियों की हड़ताल के बीच प्रशासनिक कार्य विभाजन में किया गया यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्व से जुड़े कामकाज पर हड़ताल के संभावित प्रभाव के बीच आम नागरिकों को राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना और लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने अहम चुनौती है। ऐसे में नए प्रभारों का वास्तविक असर प्रशासनिक कामकाज और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं पर किस तरह पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

विकास कार्यों में तेजी और सुशासन की कसौटी पर प्रशासन

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का पुनर्निर्धारण ऐसे समय में किया गया है, जब जिले में विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की प्रगति और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित अधिकारी अपने विभागों के बीच कितना प्रभावी समन्वय स्थापित करते हैं, शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक कितनी तेजी से पहुंचता है और आम जनता की समस्याओं का समाधान कितनी समयबद्धता से होता है।अब प्रशासनिक बदलाव के बाद सबसे बड़ी कसौटी यह होगी कि निर्धारित जिम्मेदारियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर विकास कार्यों की गति, राजस्व प्रकरणों के निराकरण और आम नागरिकों को मिलने वाली शासकीय सेवाओं में भी दिखाई दे।

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