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स्कूलों में हरियाली के साथ पोषण की पाठशाला, किचन गार्डन से खेती के गुर सीख रहे बच्चे।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर जिले के शासकीय स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ बच्चों को प्रकृति, पोषण और खेती से जोड़ने की अनूठी पहल की जा रही है। स्कूलों की खाली जमीन पर विकसित किए जा रहे किचन गार्डन बच्चों के लिए पोषण के साथ व्यावहारिक शिक्षा का माध्यम बन रहे हैं। जिले के अब तक 100 स्कूलों में किचन गार्डन तैयार किए जा चुके हैं। पर्याप्त भूमि और पानी की सुविधा वाले अन्य स्कूलों में भी इन्हें विकसित करने का कार्य जारी है। इस पहल से शाला परिसर हरे-भरे होने के साथ बच्चों में पर्यावरण संरक्षण, पौष्टिक आहार और खेती-किसानी के प्रति रुचि बढ़ रही है।किचन गार्डन को विकसित करने में शाला प्रबंधन समितियों के साथ पालकों और स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय सहभागिता है। ग्रामीण और पालक भूमि तैयार करने, पौधरोपण तथा पौधों की देखभाल में सहयोग कर रहे हैं। सामूहिक प्रयासों से स्कूलों की खाली जमीन हरी-भरी बगिया में बदल रही है। इससे बच्चों को श्रम का महत्व समझने के साथ मिल-जुलकर काम करने की सीख भी मिल रही है।*स्कूल की बगिया में उग रहीं हरी सब्जियां -*किचन गार्डन में स्थानीय मौसम और जलवायु के अनुरूप विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इनमें लौकी, बरबटी, ग्वारफली, भिंडी, चेंचभाजी और अमारी भाजी के साथ शीत ऋतु में पालक, मेथी, धनिया, बैंगन और सरसों भाजी शामिल हैं। इन बगियाओं में तैयार सब्जियों का उपयोग बच्चों के भोजन में भी किया जा सकेगा। इससे बच्चों को ताजी एवं पौष्टिक सब्जियां उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।*पदुमपारा स्कूल बना प्रेरक उदाहरण -*शासकीय प्राथमिक शाला पदुमपारा, संकुल सलका नवागांव में विकसित किचन गार्डन इस पहल का अच्छा उदाहरण है। वर्ष 1996 में स्थापित इस स्कूल में वर्ष 2023 से किचन गार्डन संचालित किया जा रहा है। यहां अध्ययनरत 17 बालक और 15 बालिकाएं दो शिक्षकों के मार्गदर्शन में खेती-किसानी की बारीकियों से परिचित हो रहे हैं। बच्चे पौधों की वृद्धि, उनकी देखभाल और सब्जियों के उत्पादन की प्रक्रिया को करीब से देख और समझ रहे हैं।*किताबों से निकलकर प्रकृति की पाठशाला में सीख रहे बच्चे -*स्कूलों में विकसित किचन गार्डन बच्चों के लिए खुली पाठशाला का काम कर रहे हैं। यहां बच्चे किताबों में पढ़ी बातों को प्रत्यक्ष रूप से समझ रहे हैं। बीज से पौधा बनने, मौसम के अनुसार फसलों की वृद्धि और पौधों की नियमित देखभाल जैसी गतिविधियां उन्हें प्रकृति से जोड़ रही हैं। साथ ही बच्चों में पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पर्यावरण और श्रम के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो रहा है।किचन गार्डन की यह पहल स्कूलों को शिक्षा के साथ पोषण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। शिक्षकों, पालकों और ग्रामीणों के साझा प्रयास से संवर रही ये बगियाएं बच्चों को न केवल खेती के गुर सिखा रही हैं, बल्कि मिट्टी से जुड़ाव, श्रम का सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण संदेश भी दे रही हैं।

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